श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 69: दल-बल सहित राजा दशरथ की मिथिला-यात्रा और वहाँ राजा जनक के द्वारा उनका स्वागत-सत्कार  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.69.9 
उवाच वचनं श्रेष्ठो नरश्रेष्ठं मुदान्वितम्।
स्वागतं ते नरश्रेष्ठ दिष्टॺा प्राप्तोऽसि राघव॥ ९॥
 
 
अनुवाद
राजाओं में श्रेष्ठ मिथिला नरेश नरसा ने हर्ष से परिपूर्ण राजा दशरथ से कहा - 'पुरुषों में श्रेष्ठ रघुनंदन! आपका स्वागत है। यह मेरा सौभाग्य है कि आप यहाँ पधारे॥9॥
 
Mithila Narasa, the best among kings, said to King Dashrath, who was full of joy - 'Raghunandan, the best of men! you are welcome. It is my great fortune that you came here. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)