श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 69: दल-बल सहित राजा दशरथ की मिथिला-यात्रा और वहाँ राजा जनक के द्वारा उनका स्वागत-सत्कार  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  1.69.15-16h 
तद् धर्मिष्ठं यशस्यं च वचनं सत्यवादिन:॥ १५॥
श्रुत्वा विदेहाधिपति: परं विस्मयमागत:।
 
 
अनुवाद
सत्यवादी राजा दशरथ के उन धर्ममय तथा यशवर्धक वचनों को सुनकर विदेहराज जनक को बड़ा आश्चर्य हुआ।
 
Hearing those righteous and fame-enhancing words of truthful King Dasharatha, King Janaka of Videha was astonished. 15 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)