श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 69: दल-बल सहित राजा दशरथ की मिथिला-यात्रा और वहाँ राजा जनक के द्वारा उनका स्वागत-सत्कार  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  1.69.11-12h 
दिष्टॺा मे निर्जिता विघ्ना दिष्टॺा मे पूजितं कुलम्॥ ११॥
राघवै: सह सम्बन्धाद् वीर्यश्रेष्ठैर्महाबलै:।
 
 
अनुवाद
सौभाग्य से मेरे सभी विघ्न दूर हो गए हैं। रघुकुल के महापुरुष महान बलवान और पराक्रम में श्रेष्ठ हैं। इस कुल के साथ मेरे संबंध के कारण आज मेरे कुल का मान बढ़ गया है॥ 11 1/2॥
 
‘Fortunately, all my obstacles have been overcome. The great men of the Raghukul are blessed with great strength and are the best in valour. Due to my association with this clan, the honour of my clan has increased today.॥ 11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)