श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 69: दल-बल सहित राजा दशरथ की मिथिला-यात्रा और वहाँ राजा जनक के द्वारा उनका स्वागत-सत्कार  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  1.69.10-11h 
पुत्रयोरुभयो: प्रीतिं लप्स्यसे वीर्यनिर्जिताम्।
दिष्टॺा प्राप्तो महातेजा वसिष्ठो भगवानृषि:॥ १०॥
सह सर्वैर्द्विजश्रेष्ठैर्देवैरिव शतक्रतु:।
 
 
अनुवाद
यहाँ तुम्हें अपने दोनों पुत्रों का प्रेम प्राप्त होगा, जो उन्होंने अपने पराक्रम से प्राप्त किया है। महाबली वसिष्ठ ऋषि भी हमारे सौभाग्य से यहाँ पधारे हैं। वे इन सभी श्रेष्ठ ब्राह्मणों के साथ उसी प्रकार शोभायमान हैं, जैसे देवताओं के साथ इन्द्र शोभायमान होते हैं॥10 1/2॥
 
‘Here you will receive the love of both your sons, which they have won by their valour. The mighty sage Vasishtha has also come here due to our good fortune. He looks as graceful with all these great Brahmins as Indra looks graceful with the gods.॥ 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)