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प्रत्याश्वस्ते जने तस्मिन् राजा विगतसाध्वस:।
उवाच प्राञ्जलिर्वाक्यं वाक्यज्ञो मुनिपुंगवम्॥ २०॥
अनुवाद
थोड़ी देर बाद जब सब लोग सावधान हो गए, तब बोलने में कुशल और वचनों का सार समझने वाले निर्भय राजा जनक ने हाथ जोड़कर मुनि विश्वामित्र से कहा-॥20॥
After a while when everyone became alert, then the fearless King Janaka, who was skilled in speaking and understood the essence of the words, folded his hands and said to the sage Visvamitra -॥ 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥