Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.66.9-10: कहते हैं कि पूर्वकाल में दक्ष यज्ञ के विध्वंस के समय परम पराक्रमी भगवान शंकर ने क्रोधवश खेल-खेल में इस धनुष को उठा लिया था और यज्ञ विध्वंस के पश्चात देवताओं से कहा था - 'देवताओं! मैं यज्ञ में भाग पाना चाहता था, किन्तु आप सबने मुझे भाग नहीं दिया। अतः मैं इस धनुष से आप सबका सबसे पूजनीय एवं उत्तम अंग - मस्तक - काट डालूँगा।'॥9-10॥ | ramayan सर्ग 1.66: राजा जनक का विश्वामित्र और राम लक्ष्मण का सत्कार, धनुष का परिचय देना और धनुष चढ़ा देने पर श्रीराम के साथ ब्याह का निश्चय प्रकट करना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कहते हैं कि पूर्वकाल में दक्ष यज्ञ के विध्वंस के समय परम पराक्रमी भगवान शंकर ने क्रोधवश खेल-खेल में इस धनुष को उठा लिया था और यज्ञ विध्वंस के पश्चात देवताओं से कहा था - 'देवताओं! मैं यज्ञ में भाग पाना चाहता था, किन्तु आप सबने मुझे भाग नहीं दिया। अतः मैं इस धनुष से आप सबका सबसे पूजनीय एवं उत्तम अंग - मस्तक - काट डालूँगा।'॥9-10॥
‘It is said that in the past, at the time of destruction of Daksha Yagna, the most mighty Lord Shankar, in a playful manner, picked up this bow in anger and after the destruction of the Yagna, said to the Gods - ‘Gods! I wanted to have a share in the Yagna, but you all did not give me. Therefore, with this bow, I will cut off the most revered and best body part of all of you – the head.'॥ 9-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥