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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 66: राजा जनक का विश्वामित्र और राम लक्ष्मण का सत्कार, धनुष का परिचय देना और धनुष चढ़ा देने पर श्रीराम के साथ ब्याह का निश्चय प्रकट करना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  1.66.25-26h 
तदेतन्मुनिशार्दूल धनु: परमभास्वरम्॥ २५॥
रामलक्ष्मणयोश्चापि दर्शयिष्यामि सुव्रत।
 
 
अनुवाद
'मुनिश्रेष्ठ! यह परम प्रकाशवान धनुष है। उत्तम व्रत का पालन करने वाले महर्षि! मैं इसे श्री राम और लक्ष्मण को भी दिखाऊँगा।'
 
‘Munishrestha! This is the most luminous bow. Maharishi who observes the best fast! I will show him to Shri Ram and Lakshman also. 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)