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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 66: राजा जनक का विश्वामित्र और राम लक्ष्मण का सत्कार, धनुष का परिचय देना और धनुष चढ़ा देने पर श्रीराम के साथ ब्याह का निश्चय प्रकट करना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  1.66.24-25h 
ततो भग्ना नृपतयो हन्यमाना दिशो ययु:॥ २४॥
अवीर्या वीर्यसंदिग्धा: सामात्या: पापकारिण:।
 
 
अनुवाद
'तब हमारे सैनिकों से पराजित होकर वे सभी पापी राजा, जो दुर्बल थे अथवा जिनकी शक्ति संदिग्ध थी, अपने मंत्रियों सहित भिन्न-भिन्न दिशाओं में भाग गये।
 
'Then, after being beaten by our soldiers, all those sinful kings who were weak or whose strength was doubtful, fled along with their ministers in different directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)