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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 66: राजा जनक का विश्वामित्र और राम लक्ष्मण का सत्कार, धनुष का परिचय देना और धनुष चढ़ा देने पर श्रीराम के साथ ब्याह का निश्चय प्रकट करना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  1.66.20-21h 
तत: परमकोपेन राजानो मुनिपुंगव॥ २०॥
अरुन्धन् मिथिलां सर्वे वीर्यसंदेहमागता:।
 
 
अनुवाद
'हे महामुनि! मेरे मना करने पर ये सभी राजा अत्यन्त क्रोधित होकर तथा अपने पराक्रम पर संदेह करके मिथिला को चारों ओर से घेरकर खड़े हो गये।
 
'O great sage! Upon my refusal, all these kings became very angry and doubtful about their prowess, they surrounded Mithila from all sides and stood there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)