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ramayan 1.66.16-17h: परंतु हे प्रभु! जो राजा मेरी पुत्री से विवाह करने का प्रयत्न कर रहे थे, उन सब से मैंने कहा था कि मेरी पुत्री वीर्यसूलका है। (उचित पराक्रम दिखाने पर ही कोई पुरुष उससे विवाह करने के योग्य हो सकता है।) यही कारण है कि मैंने आज तक अपनी पुत्री किसी को नहीं दी।॥16 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.66: राजा जनक का विश्वामित्र और राम लक्ष्मण का सत्कार, धनुष का परिचय देना और धनुष चढ़ा देने पर श्रीराम के साथ ब्याह का निश्चय प्रकट करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 66: राजा जनक का विश्वामित्र और राम लक्ष्मण का सत्कार, धनुष का परिचय देना और धनुष चढ़ा देने पर श्रीराम के साथ ब्याह का निश्चय प्रकट करना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  1.66.16-17h 
तेषां वरयतां कन्यां सर्वेषां पृथिवीक्षिताम्॥ १६॥
वीर्यशुल्केति भगवन् न ददामि सुतामहम्।
 
 
अनुवाद
परंतु हे प्रभु! जो राजा मेरी पुत्री से विवाह करने का प्रयत्न कर रहे थे, उन सब से मैंने कहा था कि मेरी पुत्री वीर्यसूलका है। (उचित पराक्रम दिखाने पर ही कोई पुरुष उससे विवाह करने के योग्य हो सकता है।) यही कारण है कि मैंने आज तक अपनी पुत्री किसी को नहीं दी।॥16 1/2॥
 
‘But, O Lord! I told all those kings who were trying to marry my daughter that my daughter is a viryasulkā. (Only after showing appropriate bravery can a man be eligible to marry her.) This is the reason why I have not given my daughter to anyone till date.॥ 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)