Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.65.38: राजा की यह बात सुनकर मुनि विश्वामित्र मन ही मन बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने पुरुषोत्तम प्रिय राजा जनक की प्रशंसा की और उन्हें शीघ्र ही विदा कर दिया।   |   ramayan सर्ग 1.65: विश्वामित्र की घोर तपस्या, उन्हें ब्राह्मणत्व की प्राप्ति तथा राजा जनक का उनकी प्रशंसा करके उनसे विदा ले राजभवन को लौटना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 65: विश्वामित्र की घोर तपस्या, उन्हें ब्राह्मणत्व की प्राप्ति तथा राजा जनक का उनकी प्रशंसा करके उनसे विदा ले राजभवन को लौटना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.65.38 
एवमुक्तो मुनिवर: प्रशस्य पुरुषर्षभम्।
विससर्जाशु जनकं प्रीतं प्रीतमनास्तदा॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
राजा की यह बात सुनकर मुनि विश्वामित्र मन ही मन बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने पुरुषोत्तम प्रिय राजा जनक की प्रशंसा की और उन्हें शीघ्र ही विदा कर दिया।
 
On hearing the King say this, sage Vishwamitra was very pleased in his heart. He praised the loving King Janaka, the best of men, and soon sent him off.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)