Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.65.20-21h: 'ब्रह्मन्! मैं तुम्हें मरुतों सहित दीर्घायु प्रदान करता हूँ। तुम समृद्ध होओ। हे भद्र! तुम सौभाग्य के भागी बनो और जहाँ चाहो, वहाँ सुखपूर्वक जाओ।'॥20 1/2॥ | ramayan सर्ग 1.65: विश्वामित्र की घोर तपस्या, उन्हें ब्राह्मणत्व की प्राप्ति तथा राजा जनक का उनकी प्रशंसा करके उनसे विदा ले राजभवन को लौटना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दीर्घमायुश्च ते ब्रह्मन् ददामि समरुद्गण:॥ २०॥
स्वस्ति प्राप्नुहि भद्रं ते गच्छ सौम्य यथासुखम्।
अनुवाद
'ब्रह्मन्! मैं तुम्हें मरुतों सहित दीर्घायु प्रदान करता हूँ। तुम समृद्ध होओ। हे भद्र! तुम सौभाग्य के भागी बनो और जहाँ चाहो, वहाँ सुखपूर्वक जाओ।'॥20 1/2॥
'Brahman! I grant you a long life along with the Maruts. May you prosper. O gentle one! May you be a part of the good fortune and go wherever you wish happily.'॥ 20 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥