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ramayan 1.64.9: विश्वामित्र ने मधुर वाणी वाली कोयल की मधुर वाणी सुनी। प्रसन्न मन से उस ओर देखा तो रम्भा सामने खड़ी दिखाई दी।   |   ramayan सर्ग 1.64: विश्वामित्र का रम्भा को शाप देकर पुनः घोर तपस्या के लिये दीक्षा लेना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 64: विश्वामित्र का रम्भा को शाप देकर पुनः घोर तपस्या के लिये दीक्षा लेना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.64.9 
कोकिलस्य तु शुश्राव वल्गु व्याहरत: स्वनम्।
सम्प्रहृष्टेन मनसा स चैनामन्ववैक्षत॥ ९॥
 
 
अनुवाद
विश्वामित्र ने मधुर वाणी वाली कोयल की मधुर वाणी सुनी। प्रसन्न मन से उस ओर देखा तो रम्भा सामने खड़ी दिखाई दी।
 
Vishwamitra heard the sweet call of the sweet-talking cuckoo. When he looked in that direction with a happy heart, he saw Rambha standing in front of him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)