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ramayan 1.64.6: 'वैशाख मास में जब प्रत्येक वृक्ष नये पत्तों से सुसज्जित होगा, तब मैं कोयल और कामदेव के साथ तुम्हारे निकट रहूंगी, जो अपनी मधुर वाणी से सबके मन को मोह लेते हैं।   |   ramayan सर्ग 1.64: विश्वामित्र का रम्भा को शाप देकर पुनः घोर तपस्या के लिये दीक्षा लेना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 64: विश्वामित्र का रम्भा को शाप देकर पुनः घोर तपस्या के लिये दीक्षा लेना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.64.6 
कोकिलो हृदयग्राही माधवे रुचिरद्रुमे।
अहं कन्दर्पसहित: स्थास्यामि तव पार्श्वत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'वैशाख मास में जब प्रत्येक वृक्ष नये पत्तों से सुसज्जित होगा, तब मैं कोयल और कामदेव के साथ तुम्हारे निकट रहूंगी, जो अपनी मधुर वाणी से सबके मन को मोह लेते हैं।
 
'In the month of Vaisakha, when every tree is adorned with new leaves, I will be near you along with the cuckoo and Kamadeva, who attracts everyone's heart with its sweet call.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)