vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 1: बाल काण्ड
»
सर्ग 64: विश्वामित्र का रम्भा को शाप देकर पुनः घोर तपस्या के लिये दीक्षा लेना
»
श्लोक 13
श्लोक
1.64.13
ब्राह्मण: सुमहातेजास्तपोबलसमन्वित:।
उद्धरिष्यति रम्भे त्वां मत्क्रोधकलुषीकृताम्॥ १३॥
अनुवाद
'रम्भे! शाप पूर्ण होने पर एक महान एवं तेजस्वी ब्राह्मण (ब्रह्माजी के पुत्र वशिष्ठ) मेरे क्रोध से कलंकित होकर तुम्हें बचायेंगे।
'Rambhe! After the completion of the curse, a great and brilliant Brahmin (Brahmaji's son Vashishtha) will save you, tainted by my anger.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×