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ramayan 1.64.11: वे देवताओं के राजा का सारा षडयंत्र समझ गए। तब क्रोध में भरे हुए ऋषि विश्वामित्र ने रम्भा को शाप देते हुए कहा-॥11॥   |   ramayan सर्ग 1.64: विश्वामित्र का रम्भा को शाप देकर पुनः घोर तपस्या के लिये दीक्षा लेना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 64: विश्वामित्र का रम्भा को शाप देकर पुनः घोर तपस्या के लिये दीक्षा लेना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.64.11 
सहस्राक्षस्य तत्सर्वं विज्ञाय मुनिपुंगव:।
रम्भां क्रोधसमाविष्ट: शशाप कुशिकात्मज:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वे देवताओं के राजा का सारा षडयंत्र समझ गए। तब क्रोध में भरे हुए ऋषि विश्वामित्र ने रम्भा को शाप देते हुए कहा-॥11॥
 
He understood the whole conspiracy of the king of gods. Then sage Vishwamitra, filled with anger, cursed Rambha and said-॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)