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ramayan 1.63.9-10h: इतना समय बीत जाने पर महर्षि विश्वामित्र को लज्जा हुई। वे चिंता और शोक में डूब गए।   |   ramayan सर्ग 1.63: विश्वामित्र को ऋषि एवं महर्षिपद की प्राप्ति, मेनका द्वारा उनका तपोभंग तथा ब्रह्मर्षिपद की प्राप्ति के लिये उनकी घोर तपस्या   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.63.9-10h 
अथ काले गते तस्मिन् विश्वामित्रो महामुनि:॥ ९॥
सव्रीड इव संवृत्तश्चिन्ताशोकपरायण:।
 
 
अनुवाद
इतना समय बीत जाने पर महर्षि विश्वामित्र को लज्जा हुई। वे चिंता और शोक में डूब गए।
 
After so much time had passed, the great sage Vishwamitra felt ashamed. He was drowned in worry and grief. 9 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)