श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 63: विश्वामित्र को ऋषि एवं महर्षिपद की प्राप्ति, मेनका द्वारा उनका तपोभंग तथा ब्रह्मर्षिपद की प्राप्ति के लिये उनकी घोर तपस्या  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.63.7 
अनुगृह्णीष्व भद्रं ते मदनेन विमोहितम्।
इत्युक्ता सा वरारोहा तत्र वासमथाकरोत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
‘आपका कल्याण हो। मैं काम-वासना से मोहित हो रहा हूँ। मुझ पर कृपा कीजिए।’ उनके ऐसा कहने पर सुन्दर कमर वाली मेनका वहाँ रहने लगी।
 
'May you be blessed. I am being tempted by lust. Be kind to me.' After he said this, Menaka with beautiful waist started living there.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd