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ramayan 1.63.5: महाबली कुशिकानंदन विश्वामित्र ने वहाँ मेनका को देखा। उनका सौंदर्य और लावण्य अतुलनीय था। जैसे बादलों में बिजली चमकती है, वैसे ही पुष्कर के जल में वे अत्यंत सुंदर लग रही थीं।   |   ramayan सर्ग 1.63: विश्वामित्र को ऋषि एवं महर्षिपद की प्राप्ति, मेनका द्वारा उनका तपोभंग तथा ब्रह्मर्षिपद की प्राप्ति के लिये उनकी घोर तपस्या   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 63: विश्वामित्र को ऋषि एवं महर्षिपद की प्राप्ति, मेनका द्वारा उनका तपोभंग तथा ब्रह्मर्षिपद की प्राप्ति के लिये उनकी घोर तपस्या  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.63.5 
तां ददर्श महातेजा मेनकां कुशिकात्मज:।
रूपेणाप्रतिमां तत्र विद्युतं जलदे यथा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महाबली कुशिकानंदन विश्वामित्र ने वहाँ मेनका को देखा। उनका सौंदर्य और लावण्य अतुलनीय था। जैसे बादलों में बिजली चमकती है, वैसे ही पुष्कर के जल में वे अत्यंत सुंदर लग रही थीं।
 
The mighty Kushikanandan Vishwamitra saw Menaka there. Her beauty and grace were incomparable. Just like lightning flashes in the clouds, she looked beautiful in the waters of Pushkar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)