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ramayan 1.63.3: ऐसा कहकर देवराज ब्रह्माजी पुनः स्वर्गलोक को चले गए। उधर, महाबली विश्वामित्र पुनः घोर तपस्या में लग गए।   |   ramayan सर्ग 1.63: विश्वामित्र को ऋषि एवं महर्षिपद की प्राप्ति, मेनका द्वारा उनका तपोभंग तथा ब्रह्मर्षिपद की प्राप्ति के लिये उनकी घोर तपस्या   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 63: विश्वामित्र को ऋषि एवं महर्षिपद की प्राप्ति, मेनका द्वारा उनका तपोभंग तथा ब्रह्मर्षिपद की प्राप्ति के लिये उनकी घोर तपस्या  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.63.3 
तमेवमुक्त्वा देवेशस्त्रिदिवं पुनरभ्यगात्।
विश्वामित्रो महातेजा भूयस्तेपे महत् तप:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर देवराज ब्रह्माजी पुनः स्वर्गलोक को चले गए। उधर, महाबली विश्वामित्र पुनः घोर तपस्या में लग गए।
 
Having said this to him, the lord of gods, Brahmaji again went to heaven. Meanwhile, the mighty Vishwamitra again got involved in a great penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)