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ramayan 1.63.25: जब महान ऋषि विश्वामित्र इस प्रकार तपस्या कर रहे थे, तब देवता और इंद्र बहुत दुःखी हो गए।   |   ramayan सर्ग 1.63: विश्वामित्र को ऋषि एवं महर्षिपद की प्राप्ति, मेनका द्वारा उनका तपोभंग तथा ब्रह्मर्षिपद की प्राप्ति के लिये उनकी घोर तपस्या   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.63.25 
तस्मिन् संतप्यमाने तु विश्वामित्रे महामुनौ।
संताप: सुमहानासीत् सुराणां वासवस्य च॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जब महान ऋषि विश्वामित्र इस प्रकार तपस्या कर रहे थे, तब देवता और इंद्र बहुत दुःखी हो गए।
 
When the great sage Viswamitra was performing penance in this manner, the gods and Indra were greatly distressed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)