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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 63: विश्वामित्र को ऋषि एवं महर्षिपद की प्राप्ति, मेनका द्वारा उनका तपोभंग तथा ब्रह्मर्षिपद की प्राप्ति के लिये उनकी घोर तपस्या  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  1.63.21-22h 
तमुवाच ततो ब्रह्मा न तावत् त्वं जितेन्द्रिय:॥ २१॥
यतस्व मुनिशार्दूल इत्युक्त्वा त्रिदिवं गत:।
 
 
अनुवाद
तब ब्रह्माजी ने उनसे कहा, ‘हे महामुनि! आपने अभी तक अपनी इन्द्रियों पर विजय प्राप्त नहीं की है। इसके लिए प्रयास कीजिए।’ ऐसा कहकर वे स्वर्गलोक चले गए।
 
Then Lord Brahma said to him, 'O great sage! You have not yet conquered your senses. Try for it.' Saying this, he went to heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)