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ramayan 1.63.2: उस समय तेजस्वी ब्रह्माजी ने मधुर वाणी में कहा - 'मुने! तुम्हारा कल्याण हो। अब तुम अपने पुण्यकर्मों के कारण ऋषि हो गए हो।'   |   ramayan सर्ग 1.63: विश्वामित्र को ऋषि एवं महर्षिपद की प्राप्ति, मेनका द्वारा उनका तपोभंग तथा ब्रह्मर्षिपद की प्राप्ति के लिये उनकी घोर तपस्या   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 63: विश्वामित्र को ऋषि एवं महर्षिपद की प्राप्ति, मेनका द्वारा उनका तपोभंग तथा ब्रह्मर्षिपद की प्राप्ति के लिये उनकी घोर तपस्या  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.63.2 
अब्रवीत् सुमहातेजा ब्रह्मा सुरुचिरं वच:।
ऋषिस्त्वमसि भद्रं ते स्वार्जितै: कर्मभि: शुभै:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस समय तेजस्वी ब्रह्माजी ने मधुर वाणी में कहा - 'मुने! तुम्हारा कल्याण हो। अब तुम अपने पुण्यकर्मों के कारण ऋषि हो गए हो।'
 
At that time, the brilliant Brahmaji said in a sweet voice – 'Mune! May you be well. Now you have become a sage due to the good deeds you have earned. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)