Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.63.17-19h: देवताओं की बातें सुनकर समस्त लोकों के पिता भगवान ब्रह्माजी तपोधन विश्वामित्र के पास गए और मधुर वाणी में बोले - 'महर्षि! आपका स्वागत है। वत्स कौशिक! मैं आपकी उग्र तपस्या से अत्यंत संतुष्ट हूँ और आपको ऋषियों में महत्व एवं श्रेष्ठता प्रदान करता हूँ।' 17-18 1/2" | ramayan सर्ग 1.63: विश्वामित्र को ऋषि एवं महर्षिपद की प्राप्ति, मेनका द्वारा उनका तपोभंग तथा ब्रह्मर्षिपद की प्राप्ति के लिये उनकी घोर तपस्या । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवताओं की बातें सुनकर समस्त लोकों के पिता भगवान ब्रह्माजी तपोधन विश्वामित्र के पास गए और मधुर वाणी में बोले - 'महर्षि! आपका स्वागत है। वत्स कौशिक! मैं आपकी उग्र तपस्या से अत्यंत संतुष्ट हूँ और आपको ऋषियों में महत्व एवं श्रेष्ठता प्रदान करता हूँ।' 17-18 1/2"
After listening to the words of the gods, Lord Brahmaji, the father of all the worlds, went to Tapodhan Vishwamitra and said in a sweet voice - 'Maharshe! You are welcome. Vatsa Kaushik! I am very satisfied with your fierce penance and give you importance and superiority among the sages. 17-18 1/2"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥