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स कृत्वा नैष्ठिकीं बुद्धिं जेतुकामो महायशा:॥ १४॥
कौशिकीतीरमासाद्य तपस्तेपे दुरासदम्।
अनुवाद
वहाँ उन महामुनि ने अपने दृढ़ मन का आश्रय लेकर कौशिकी नदी के तट पर जाकर कामदेव को जीतने के लिए घोर तपस्या आरम्भ की ॥14 1/2॥
There, that great sage, taking the help of his determined mind, went to the banks of Kaushiki and started his formidable penance to conquer Kamadeva. 14 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥