Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.63.13-14h: उस समय मेनका अप्सरा भयभीत होकर हाथ जोड़कर काँपती हुई उनके सामने खड़ी हो गई। उसकी ओर देखकर कुशिकपुत्र विश्वामित्र ने मधुर वचनों से उसे विदा किया और स्वयं उत्तर पर्वत (हिमवान) पर चले गए।॥13 1/2॥ | ramayan सर्ग 1.63: विश्वामित्र को ऋषि एवं महर्षिपद की प्राप्ति, मेनका द्वारा उनका तपोभंग तथा ब्रह्मर्षिपद की प्राप्ति के लिये उनकी घोर तपस्या । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय मेनका अप्सरा भयभीत होकर हाथ जोड़कर काँपती हुई उनके सामने खड़ी हो गई। उसकी ओर देखकर कुशिकपुत्र विश्वामित्र ने मधुर वचनों से उसे विदा किया और स्वयं उत्तर पर्वत (हिमवान) पर चले गए।॥13 1/2॥
At that time, Menaka Apsara became frightened and stood before him with folded hands, trembling. Looking at her, Vishwamitra, the son of Kushika, bid her farewell with sweet words and himself went to the northern mountain (Himavan).॥ 13 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥