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ramayan 1.61.3: हम लोग पश्चिम दिशा में स्थित महान ब्रह्माजी के तीन पुष्करों के पास सुखपूर्वक तपस्या करेंगे; क्योंकि वह तपोवन अत्यंत सुखदायी है।॥3॥   |   ramayan सर्ग 1.61: विश्वामित्र की पुष्कर तीर्थ में तपस्या तथा राजर्षि अम्बरीष का ऋचीक के मध्यम पुत्र शुनःशेप को यज्ञ-पशु बनाने के लिये खरीदकर लाना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 61: विश्वामित्र की पुष्कर तीर्थ में तपस्या तथा राजर्षि अम्बरीष का ऋचीक के मध्यम पुत्र शुनःशेप को यज्ञ-पशु बनाने के लिये खरीदकर लाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.61.3 
पश्चिमायां विशालायां पुष्करेषु महात्मन:।
सुखं तपश्चरिष्याम: सुखं तद्धि तपोवनम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हम लोग पश्चिम दिशा में स्थित महान ब्रह्माजी के तीन पुष्करों के पास सुखपूर्वक तपस्या करेंगे; क्योंकि वह तपोवन अत्यंत सुखदायी है।॥3॥
 
'We will happily perform tapasya near the three Pushkars of the great Brahmaji which are situated in the vast western direction; because that Tapovan is very pleasant.'॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)