श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 61: विश्वामित्र की पुष्कर तीर्थ में तपस्या तथा राजर्षि अम्बरीष का ऋचीक के मध्यम पुत्र शुनःशेप को यज्ञ-पशु बनाने के लिये खरीदकर लाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.61.24 
अम्बरीषस्तु राजर्षी रथमारोप्य सत्वर:।
शुन:शेपं महातेजा जगामाशु महायशा:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
पराक्रमी एवं प्रतापी राजा अम्बरीष ने शुनःशेप को रथ पर बिठाया और बड़ी शीघ्रता एवं तीव्र गति से आगे बढ़े।
 
The mighty and glorious king Ambarisha seated Shunashep on the chariot and moved forward very hastily and at a fast speed.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे एकषष्टितम: सर्ग:॥ ६१॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें एकसठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६१॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)