Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.61.21: 'राजकुमार! पिता ने ज्येष्ठ पुत्र को और माता ने कनिष्ठ पुत्र को विक्रय के अयोग्य घोषित किया है। अतः मैं समझता हूँ कि उन दोनों की दृष्टि में मझला पुत्र ही विक्रय के योग्य है। अतः आप मुझे ही ले जाइए। 21॥ | ramayan सर्ग 1.61: विश्वामित्र की पुष्कर तीर्थ में तपस्या तथा राजर्षि अम्बरीष का ऋचीक के मध्यम पुत्र शुनःशेप को यज्ञ-पशु बनाने के लिये खरीदकर लाना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पिता ज्येष्ठमविक्रेयं माता चाह कनीयसम्।
विक्रेयं मध्यमं मन्ये राजपुत्र नयस्व माम्॥ २१॥
अनुवाद
'राजकुमार! पिता ने ज्येष्ठ पुत्र को और माता ने कनिष्ठ पुत्र को विक्रय के अयोग्य घोषित किया है। अतः मैं समझता हूँ कि उन दोनों की दृष्टि में मझला पुत्र ही विक्रय के योग्य है। अतः आप मुझे ही ले जाइए। 21॥
'Prince! The father has declared the eldest son and the mother has declared the junior son unfit to be sold. Therefore, I think that in the eyes of both of them, only the middle son is eligible to be sold. That's why you take me only. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥