श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 61: विश्वामित्र की पुष्कर तीर्थ में तपस्या तथा राजर्षि अम्बरीष का ऋचीक के मध्यम पुत्र शुनःशेप को यज्ञ-पशु बनाने के लिये खरीदकर लाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.61.19 
प्रायेण हि नरश्रेष्ठ ज्येष्ठा: पितृषु वल्लभा:।
मातॄणां च कनीयांसस्तस्माद् रक्ष्ये कनीयसम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! प्रायः ज्येष्ठ पुत्र पिता को प्रिय होता है और छोटा पुत्र माता को प्रिय होता है। अतः मैं अपने छोटे पुत्र की अवश्य रक्षा करूँगा।॥19॥
 
'O best of men! Usually the eldest son is loved by the father and the younger son is loved by the mother. Therefore I will definitely protect my younger son.'॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)