Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.61.17-18: प्रभु! भगवान भार्गव कहते हैं कि ज्येष्ठ पुत्र कभी बेचने योग्य नहीं होता; किन्तु आपको यह जानना चाहिए कि सबसे छोटा पुत्र शुनक भी मुझे अत्यंत प्रिय है। अतः हे पृथ्वीपति! मैं अपना सबसे छोटा पुत्र आपको कभी नहीं दूँगा।॥ 17-18॥ | ramayan सर्ग 1.61: विश्वामित्र की पुष्कर तीर्थ में तपस्या तथा राजर्षि अम्बरीष का ऋचीक के मध्यम पुत्र शुनःशेप को यज्ञ-पशु बनाने के लिये खरीदकर लाना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रभु! भगवान भार्गव कहते हैं कि ज्येष्ठ पुत्र कभी बेचने योग्य नहीं होता; किन्तु आपको यह जानना चाहिए कि सबसे छोटा पुत्र शुनक भी मुझे अत्यंत प्रिय है। अतः हे पृथ्वीपति! मैं अपना सबसे छोटा पुत्र आपको कभी नहीं दूँगा।॥ 17-18॥
‘Prabhu! Lord Bhargava says that the eldest son is never worth selling; but you should know that the youngest son Shunak is very dear to me too. Therefore, O Lord of the Earth! I will never give my youngest son to you.॥ 17-18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥