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ramayan 1.61.10-11: हे रघुनन्दन! नाना देशों, जनपदों, नगरों, वनों और पवित्र आश्रमों में खोज करते हुए राजा अम्बरीष भृगुतुंग पर्वत पर पहुँचे और वहाँ उन्होंने ऋचीक ऋषि को अपनी पत्नी और पुत्रों के साथ बैठे हुए देखा॥10-11॥   |   ramayan सर्ग 1.61: विश्वामित्र की पुष्कर तीर्थ में तपस्या तथा राजर्षि अम्बरीष का ऋचीक के मध्यम पुत्र शुनःशेप को यज्ञ-पशु बनाने के लिये खरीदकर लाना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 61: विश्वामित्र की पुष्कर तीर्थ में तपस्या तथा राजर्षि अम्बरीष का ऋचीक के मध्यम पुत्र शुनःशेप को यज्ञ-पशु बनाने के लिये खरीदकर लाना  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  1.61.10-11 
देशाञ्जनपदांस्तांस्तान् नगराणि वनानि च।
आश्रमाणि च पुण्यानि मार्गमाणो महीपति:॥ १०॥
स पुत्रसहितं तात सभार्यं रघुनन्दन।
भृगुतुंगे समासीनमृचीकं संददर्श ह॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे रघुनन्दन! नाना देशों, जनपदों, नगरों, वनों और पवित्र आश्रमों में खोज करते हुए राजा अम्बरीष भृगुतुंग पर्वत पर पहुँचे और वहाँ उन्होंने ऋचीक ऋषि को अपनी पत्नी और पुत्रों के साथ बैठे हुए देखा॥10-11॥
 
O dear Raghunandan! After searching in various countries, districts, cities, forests and holy hermitages, king Ambarisha reached Bhrigutunga mountain and there he saw Rishi Richik sitting with his wife and sons.॥10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)