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ramayan 1.61.1: [शतानन्दजी कहते हैं-] पुरुषसिंह श्री राम! यज्ञ में आये हुए उन समस्त वनवासी ऋषियों को जाते देख महाबली विश्वामित्र ने उनसे कहा- 1॥   |   ramayan सर्ग 1.61: विश्वामित्र की पुष्कर तीर्थ में तपस्या तथा राजर्षि अम्बरीष का ऋचीक के मध्यम पुत्र शुनःशेप को यज्ञ-पशु बनाने के लिये खरीदकर लाना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 61: विश्वामित्र की पुष्कर तीर्थ में तपस्या तथा राजर्षि अम्बरीष का ऋचीक के मध्यम पुत्र शुनःशेप को यज्ञ-पशु बनाने के लिये खरीदकर लाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  1.61.1 
विश्वामित्रो महातेजा: प्रस्थितान् वीक्ष्य तानृषीन्।
अब्रवीन्नरशार्दूल सर्वांस्तान् वनवासिन:॥ १॥
 
 
अनुवाद
[शतानन्दजी कहते हैं-] पुरुषसिंह श्री राम! यज्ञ में आये हुए उन समस्त वनवासी ऋषियों को जाते देख महाबली विश्वामित्र ने उनसे कहा- 1॥
 
[Shatanandji says-] Purushasingh Shri Ram! Seeing all those forest-dwelling sages who had come for the Yagya leaving, the mighty Vishwamitra said to them - 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)