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ramayan 1.60.9-10h: महातेजस्वी विश्वामित्र स्वयं उस यज्ञ में पुरोहित (अध्वर्यु) बने। फिर धीरे-धीरे अनेक मन्त्रज्ञ ब्राह्मण ऋत्विज हुए; जिन्होंने कल्पशास्त्र के अनुसार अनुष्ठान और मन्त्रों के उच्चारण से सब कार्य सम्पन्न किए। 9 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.60: ऋषियों द्वारा यज्ञ का आरम्भ, त्रिशंकु का सशरीर स्वर्गगमन, इन्द्र द्वारा स्वर्ग से उनके गिराये जाने पर क्षुब्ध हुए विश्वामित्र का नूतन देवसर्ग के लिये उद्योग   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 60: ऋषियों द्वारा यज्ञ का आरम्भ, त्रिशंकु का सशरीर स्वर्गगमन, इन्द्र द्वारा स्वर्ग से उनके गिराये जाने पर क्षुब्ध हुए विश्वामित्र का नूतन देवसर्ग के लिये उद्योग  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  1.60.9-10h 
याजकश्च महातेजा विश्वामित्रोऽभवत् क्रतौ।
ऋत्विजश्चानुपूर्व्येण मन्त्रवन्मन्त्रकोविदा:॥ ९॥
चक्रु: सर्वाणि कर्माणि यथाकल्पं यथाविधि।
 
 
अनुवाद
महातेजस्वी विश्वामित्र स्वयं उस यज्ञ में पुरोहित (अध्वर्यु) बने। फिर धीरे-धीरे अनेक मन्त्रज्ञ ब्राह्मण ऋत्विज हुए; जिन्होंने कल्पशास्त्र के अनुसार अनुष्ठान और मन्त्रों के उच्चारण से सब कार्य सम्पन्न किए। 9 1/2॥
 
The great and brilliant Vishwamitra himself became the priest (Adhvaryu) in that yagya. Then gradually many mantra experts became Brahmins Ritvijs; Who completed all the work according to Kalpashastra with rituals and chanting mantras. 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)