श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 6: राजा दशरथ के शासनकाल में अयोध्या और वहाँ के नागरिकों की उत्तम स्थिति का वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.6.19 
क्षत्रं ब्रह्ममुखं चासीद् वैश्या: क्षत्रमनुव्रता:।
शूद्रा: स्वकर्मनिरतास्त्रीन् वर्णानुपचारिण:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रिय ब्राह्मणों को आदर देते थे, वैश्य क्षत्रियों की आज्ञा का पालन करते थे और शूद्र अपने कर्तव्य का पालन करते हुए उपर्युक्त तीनों वर्णों की सेवा में लगे रहते थे॥19॥
 
The Kshatriyas looked up to the Brahmins, the Vaishyas obeyed the orders of the Kshatriyas and the Shudras, while performing their duties, remained engaged in the service of the above-mentioned three varnas.॥ 19॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas