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ramayan 1.6.17: ब्राह्मण तथा चारों वर्णों के अन्य लोग देवताओं और अतिथियों के पूजक, कृतज्ञ, उदार, वीर और साहसी थे॥17॥   |   ramayan सर्ग 1.6: राजा दशरथ के शासनकाल में अयोध्या और वहाँ के नागरिकों की उत्तम स्थिति का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.6.17 
वर्णेष्वग्र्यचतुर्थेषु देवतातिथिपूजका:।
कृतज्ञाश्च वदान्याश्च शूरा विक्रमसंयुता:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण तथा चारों वर्णों के अन्य लोग देवताओं और अतिथियों के पूजक, कृतज्ञ, उदार, वीर और साहसी थे॥17॥
 
The Brahmins and other members of the four Varnas (castes) were worshippers of gods and guests, were grateful, generous, valiant and courageous.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)