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ramayan 1.6.15: उस नगर में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं था जो वेदों के छह अंगों को न जानता हो, व्रत न करता हो, एक हजार से कम दान देता हो, दरिद्र हो, अशांत हो या दुखी हो॥15॥   |   ramayan सर्ग 1.6: राजा दशरथ के शासनकाल में अयोध्या और वहाँ के नागरिकों की उत्तम स्थिति का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.6.15 
नाषडंगविदत्रास्ति नाव्रतो नासहस्रद:।
न दीन: क्षिप्तचित्तो वा व्यथितो वापि कश्चन॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उस नगर में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं था जो वेदों के छह अंगों को न जानता हो, व्रत न करता हो, एक हजार से कम दान देता हो, दरिद्र हो, अशांत हो या दुखी हो॥15॥
 
In that city there was no one who did not know the six parts of the Vedas, did not observe fasts, gave less than a thousand donations, was poor, disturbed or unhappy.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)