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ramayan 1.6.12: अयोध्या में ऐसा कोई नहीं था जो अग्निहोत्र और यज्ञ न करता हो; जो नीच, चोर, सदाचारी या वर्णसंकर हो॥12॥   |   ramayan सर्ग 1.6: राजा दशरथ के शासनकाल में अयोध्या और वहाँ के नागरिकों की उत्तम स्थिति का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.6.12 
नानाहिताग्निर्नायज्वा न क्षुद्रो वा न तस्कर:।
कश्चिदासीदयोध्यायां न चावृत्तो न संकर:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अयोध्या में ऐसा कोई नहीं था जो अग्निहोत्र और यज्ञ न करता हो; जो नीच, चोर, सदाचारी या वर्णसंकर हो॥12॥
 
There was no one in Ayodhya who did not perform Agnihotra and Yagna; who was mean, a thief, devoid of good conduct or belonged to a mixed caste.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)