श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 6: राजा दशरथ के शासनकाल में अयोध्या और वहाँ के नागरिकों की उत्तम स्थिति का वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.6.11 
नामृष्टभोजी नादाता नाप्यनंगदनिष्कधृक्।
नाहस्ताभरणो वापि दृश्यते नाप्यनात्मवान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वहाँ कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं दिखाई देता था जो अशुद्ध भोजन करता हो, दान न करता हो और अपने मन को वश में न रखता हो। वहाँ कोई भी ऐसा व्यक्ति दिखाई नहीं देता था जो कंगन, स्वर्ण पदक या मुहर तथा हाथ में कोई आभूषण (चूड़ी आदि) न पहने हो।
 
There was no person to be seen there who ate impure food, did not give charity and did not control his mind. There was no person to be seen who was not wearing a bracelet, a gold medal or seal and an ornament on the hand (bangle etc.).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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