श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 6: राजा दशरथ के शासनकाल में अयोध्या और वहाँ के नागरिकों की उत्तम स्थिति का वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.6.10 
नाकुण्डली नामुकुटी नास्रग्वी नाल्पभोगवान्।
नामृष्टो न नलिप्तांगो नासुगन्धश्च विद्यते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कोई नहीं था जिसके शरीर में कुण्डल, मुकुट और माला न हो। ऐसा कोई नहीं था जिसके शरीर में सुख-सुविधाओं की कमी हो। ऐसा कोई नहीं था जो स्नान करके शुद्ध न हुआ हो, जिसके शरीर पर चंदन न लगा हो और जो सुगंध से वंचित हो॥10॥
 
There was no one without earrings, crown and garland. No one was short of luxuries. There was no one who was not clean after bathing, whose body was not smeared with sandalwood and who was deprived of fragrance.॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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