श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 59: विश्वामित्र का त्रिशंकु का यज्ञ कराने के लिये ऋषिमुनियों को आमन्त्रित करना और उनकी बात न मानने वाले महोदय तथा ऋषिपुत्रों को शाप देकर नष्ट करना  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  1.59.18-19 
अद्य ते कालपाशेन नीता वैवस्वतक्षयम्॥ १८॥
सप्तजातिशतान्येव मृतपा: सम्भवन्तु ते।
श्वमांसनियताहारा मुष्टिका नाम निर्घृणा:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘आज मृत्यु के पाश से बँधकर वे यमलोक को भेजे गए हैं। अब वे मुष्टिक नामक प्रसिद्ध क्रूर चाण्डाल जाति में जन्म लेंगे, जो सात सौ जन्मों तक मृतकों की रक्षा करते हैं और कुत्ते का मांस अवश्य खाते हैं।॥18-19॥
 
‘Today, bound by the noose of death, they have been sent to Yamaloka. Now they will take birth in the famous ruthless Chandala caste called Mushtik, who guard the dead for seven hundred births and definitely eat dog meat.॥ 18-19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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