vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 1: बाल काण्ड
»
सर्ग 59: विश्वामित्र का त्रिशंकु का यज्ञ कराने के लिये ऋषिमुनियों को आमन्त्रित करना और उनकी बात न मानने वाले महोदय तथा ऋषिपुत्रों को शाप देकर नष्ट करना
»
श्लोक 16-17h
श्लोक
1.59.16-17h
तेषां तद् वचनं श्रुत्वा सर्वेषां मुनिपुंगव:॥ १६॥
क्रोधसंरक्तनयन: सरोषमिदमब्रवीत्।
अनुवाद
उनके वचन सुनकर ऋषि विश्वामित्र के नेत्र क्रोध से लाल हो गए और वे क्रोधित होकर इस प्रकार बोले -॥16 1/2॥
Upon hearing their words, sage Visvamitra's eyes became red with anger and he spoke angrily as follows -॥ 16 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×