Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.56.7-12: रघुनन्दन! उसके बाद क्रमश: मानव, मोहन, गंधर्व, स्वपन, जृंभन, मदन, संतपन, विलाप, शोषण, विदरण, सुदुर्जय वज्रास्त्र, ब्रह्मपाश, कालपाश, वरुणपाश, परमप्रिय पिनकास्त्र, सूखा-गीला दो प्रकार के अशनि, दंडास्त्र, पैशाचास्त्र, क्रौंचास्त्र, धर्मचक्र, कालचक्र, विष्णुचक्र, वायव्यास्त्र, मंथनास्त्र, हयशिरा, दो प्रकार की शक्ति, कंकाल, मूसल, महान वैद्यधारस्त्र, भयंकर कालास्त्र, भयानक त्रिशुलास्त्र, कपालास्त्र और कंकणास्त्र - इन सभी हथियारों का प्रयोग उन्होंने वशिष्ठजी पर किया। 7-12॥ | ramayan सर्ग 1.56: विश्वामित्र द्वारा वसिष्ठजी पर नाना प्रकार के दिव्यास्त्रों का प्रयोग,वसिष्ठ द्वारा ब्रह्मदण्ड से ही उनका शमन,विश्वामित्र का ब्राह्मणत्व की प्राप्ति के लिये तप करने का निश्चय । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रघुनन्दन! उसके बाद क्रमश: मानव, मोहन, गंधर्व, स्वपन, जृंभन, मदन, संतपन, विलाप, शोषण, विदरण, सुदुर्जय वज्रास्त्र, ब्रह्मपाश, कालपाश, वरुणपाश, परमप्रिय पिनकास्त्र, सूखा-गीला दो प्रकार के अशनि, दंडास्त्र, पैशाचास्त्र, क्रौंचास्त्र, धर्मचक्र, कालचक्र, विष्णुचक्र, वायव्यास्त्र, मंथनास्त्र, हयशिरा, दो प्रकार की शक्ति, कंकाल, मूसल, महान वैद्यधारस्त्र, भयंकर कालास्त्र, भयानक त्रिशुलास्त्र, कपालास्त्र और कंकणास्त्र - इन सभी हथियारों का प्रयोग उन्होंने वशिष्ठजी पर किया। 7-12॥
Raghunandan! After that, respectively, Manav, Mohan, Gandharva, Swapan, Jrimbhan, Madan, Santapan, Lamentation, Exploitation, Vidaran, Sudurjaya Vajrastra, Brahmapash, Kalpash, Varunpash, Parampriya Pinakastra, dry-wet two types of Ashni, Dandastra, Paisachastra, Kraunchastra, Dharmachakra, Kalachakra, Vishnuchakra, Vayavyastra, Manthanastra, Hayashira, two types of Shakti, skeleton, pestle, great Vaidyadharastra, fierce Kalastra, terrible Trishulastra, Kapalastra and Kankanastra - he used all these weapons on Vashishthaji. 7-12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥