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ramayan 1.56.21: 'महान् विश्वामित्र आपसे पराजित हो गए हैं। महामुनि! आपका बल अमोघ है। अब आप शान्त हो जाएँ, जिससे प्रजा का दुःख दूर हो।'॥21॥   |   ramayan सर्ग 1.56: विश्वामित्र द्वारा वसिष्ठजी पर नाना प्रकार के दिव्यास्त्रों का प्रयोग,वसिष्ठ द्वारा ब्रह्मदण्ड से ही उनका शमन,विश्वामित्र का ब्राह्मणत्व की प्राप्ति के लिये तप करने का निश्चय   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 56: विश्वामित्र द्वारा वसिष्ठजी पर नाना प्रकार के दिव्यास्त्रों का प्रयोग,वसिष्ठ द्वारा ब्रह्मदण्ड से ही उनका शमन,विश्वामित्र का ब्राह्मणत्व की प्राप्ति के लिये तप करने का निश्चय  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.56.21 
निगृहीतस्त्वया ब्रह्मन् विश्वामित्रो महाबल:।
अमोघं ते बलं श्रेष्ठ लोका: सन्तु गतव्यथा:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'महान् विश्वामित्र आपसे पराजित हो गए हैं। महामुनि! आपका बल अमोघ है। अब आप शान्त हो जाएँ, जिससे प्रजा का दुःख दूर हो।'॥21॥
 
'The mighty Vishwamitra has been defeated by you. Great sage! Your strength is infallible. Now you should calm down, so that the pain of the people may be relieved.'॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)