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ramayan 1.56.2: उस समय भगवान वशिष्ठ ने दूसरे कालदण्ड के समान ब्रह्मदण्ड को उठाकर क्रोधपूर्वक इस प्रकार कहा - 2॥   |   ramayan सर्ग 1.56: विश्वामित्र द्वारा वसिष्ठजी पर नाना प्रकार के दिव्यास्त्रों का प्रयोग,वसिष्ठ द्वारा ब्रह्मदण्ड से ही उनका शमन,विश्वामित्र का ब्राह्मणत्व की प्राप्ति के लिये तप करने का निश्चय   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 56: विश्वामित्र द्वारा वसिष्ठजी पर नाना प्रकार के दिव्यास्त्रों का प्रयोग,वसिष्ठ द्वारा ब्रह्मदण्ड से ही उनका शमन,विश्वामित्र का ब्राह्मणत्व की प्राप्ति के लिये तप करने का निश्चय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.56.2 
ब्रह्मदण्डं समुद्यम्य कालदण्डमिवापरम्।
वसिष्ठो भगवान् क्रोधादिदं वचनमब्रवीत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस समय भगवान वशिष्ठ ने दूसरे कालदण्ड के समान ब्रह्मदण्ड को उठाकर क्रोधपूर्वक इस प्रकार कहा - 2॥
 
At that time, Lord Vashishtha, picking up the Brahmadand, similar to the second Kaaldand, said angrily in this manner - 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)