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ramayan 1.56.18: महात्मा वशिष्ठ के समस्त रोमकूपों से धुएँ के समान किरणें निकलने लगीं ॥18॥   |   ramayan सर्ग 1.56: विश्वामित्र द्वारा वसिष्ठजी पर नाना प्रकार के दिव्यास्त्रों का प्रयोग,वसिष्ठ द्वारा ब्रह्मदण्ड से ही उनका शमन,विश्वामित्र का ब्राह्मणत्व की प्राप्ति के लिये तप करने का निश्चय   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 56: विश्वामित्र द्वारा वसिष्ठजी पर नाना प्रकार के दिव्यास्त्रों का प्रयोग,वसिष्ठ द्वारा ब्रह्मदण्ड से ही उनका शमन,विश्वामित्र का ब्राह्मणत्व की प्राप्ति के लिये तप करने का निश्चय  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.56.18 
रोमकूपेषु सर्वेषु वसिष्ठस्य महात्मन:।
मरीच्य इव निष्पेतुरग्नेर्धूमाकुलार्चिष:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
महात्मा वशिष्ठ के समस्त रोमकूपों से धुएँ के समान किरणें निकलने लगीं ॥18॥
 
Flames of smoke like rays started coming out from all the pores of Mahatma Vashishtha. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)