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ramayan 1.56.16: राघव! वसिष्ठजी ने अपने ब्रह्मतेज के प्रभाव से उस भयंकर ब्रह्मास्त्र को भी ब्रह्मदण्ड से शान्त कर दिया। 16॥   |   ramayan सर्ग 1.56: विश्वामित्र द्वारा वसिष्ठजी पर नाना प्रकार के दिव्यास्त्रों का प्रयोग,वसिष्ठ द्वारा ब्रह्मदण्ड से ही उनका शमन,विश्वामित्र का ब्राह्मणत्व की प्राप्ति के लिये तप करने का निश्चय   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 56: विश्वामित्र द्वारा वसिष्ठजी पर नाना प्रकार के दिव्यास्त्रों का प्रयोग,वसिष्ठ द्वारा ब्रह्मदण्ड से ही उनका शमन,विश्वामित्र का ब्राह्मणत्व की प्राप्ति के लिये तप करने का निश्चय  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.56.16 
तदप्यस्त्रं महाघोरं ब्राह्मं ब्राह्मेण तेजसा।
वसिष्ठो ग्रसते सर्वं ब्रह्मदण्डेन राघव॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राघव! वसिष्ठजी ने अपने ब्रह्मतेज के प्रभाव से उस भयंकर ब्रह्मास्त्र को भी ब्रह्मदण्ड से शान्त कर दिया। 16॥
 
Raghav! Vasisthaji, with the influence of his Brahmatej, calmed that fierce Brahmastra also with the help of Brahmadanda. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)