Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.56.13: यह एक अद्भुत घटना थी कि समस्त ध्यानियों में श्रेष्ठ महर्षि वसिष्ठ पर इतने सारे अस्त्र-शस्त्रों का प्रहार किया गया, परन्तु ब्रह्माजी के पुत्र वसिष्ठ ने अपनी छड़ी से ही उन सभी को नष्ट कर दिया॥13॥   |   ramayan सर्ग 1.56: विश्वामित्र द्वारा वसिष्ठजी पर नाना प्रकार के दिव्यास्त्रों का प्रयोग,वसिष्ठ द्वारा ब्रह्मदण्ड से ही उनका शमन,विश्वामित्र का ब्राह्मणत्व की प्राप्ति के लिये तप करने का निश्चय   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 56: विश्वामित्र द्वारा वसिष्ठजी पर नाना प्रकार के दिव्यास्त्रों का प्रयोग,वसिष्ठ द्वारा ब्रह्मदण्ड से ही उनका शमन,विश्वामित्र का ब्राह्मणत्व की प्राप्ति के लिये तप करने का निश्चय  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.56.13 
वसिष्ठे जपतां श्रेष्ठे तदद्भुतमिवाभवत्।
तानि सर्वाणि दण्डेन ग्रसते ब्रह्मण: सुत:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यह एक अद्भुत घटना थी कि समस्त ध्यानियों में श्रेष्ठ महर्षि वसिष्ठ पर इतने सारे अस्त्र-शस्त्रों का प्रहार किया गया, परन्तु ब्रह्माजी के पुत्र वसिष्ठ ने अपनी छड़ी से ही उन सभी को नष्ट कर दिया॥13॥
 
It was an astonishing event when so many weapons were launched at the great sage Vasishtha, the best of all meditators. However, Vasishtha, the son of Brahma, destroyed all of them with just his stick.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)