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ramayan 1.55.8: 'अपने समस्त पुत्रों और सेना का विनाश देखकर महाप्रतापी विश्वामित्र लज्जित हो गये और उन्हें बड़ी चिन्ता हुई।   |   ramayan सर्ग 1.55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.55.8 
दृष्ट्वा विनाशितान् सर्वान् बलं च सुमहायशा:।
सव्रीडं चिन्तयाविष्टो विश्वामित्रोऽभवत् तदा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'अपने समस्त पुत्रों और सेना का विनाश देखकर महाप्रतापी विश्वामित्र लज्जित हो गये और उन्हें बड़ी चिन्ता हुई।
 
'The illustrious Visvamitra was ashamed and fell into great worry upon seeing the destruction of all his sons and army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)