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ramayan 1.55.5-6: महात्मा वशिष्ठजी द्वारा अपनी सेना का संहार होते देख विश्वामित्रजी के सौ पुत्र अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने मन्त्रियों में श्रेष्ठ वशिष्ठजी पर नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से आक्रमण कर दिया। तब उन महर्षि ने गर्जना मात्र से ही उन सबको भस्म कर दिया।   |   ramayan सर्ग 1.55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  1.55.5-6 
दृष्ट्वा निषूदितं सैन्यं वसिष्ठेन महात्मना।
विश्वामित्रसुतानां तु शतं नानाविधायुधम्॥ ५॥
अभ्यधावत् सुसंक्रुद्धं वसिष्ठं जपतां वरम्।
हुंकारेणैव तान् सर्वान् निर्ददाह महानृषि:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
महात्मा वशिष्ठजी द्वारा अपनी सेना का संहार होते देख विश्वामित्रजी के सौ पुत्र अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने मन्त्रियों में श्रेष्ठ वशिष्ठजी पर नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से आक्रमण कर दिया। तब उन महर्षि ने गर्जना मात्र से ही उन सबको भस्म कर दिया।
 
'Seeing the destruction of their army by Mahatma Vashishtha, Vishwamitra's hundred sons became extremely angry and attacked Sage Vashishtha, the best among the chanters, with various types of weapons. Then that Maharishi burnt them all to ashes with just a roar. 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)